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नोएडा: सिस्टम की भेंट चढ़ा एक और होनहार! आधी रात घर लौट रहे 27 साल के इंजीनियर की मौत, कौन है जिम्मेदार?...

नोएडा: उत्तर प्रदेश के हाईटेक शहर नोएडा की सड़कों पर रफ्तार और लापरवाही ने एक और हंसते-खेलते परिवार की खुशियां छीन ली हैं। बीती आधी रात को ऑफिस से अपने घर लौट रहे 27 वर्षीय युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर सुरक्षा इंतजामों और प्रशासनिक सिस्टम की गंभीरता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का आरोप है कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि खराब इंफ्रास्ट्रक्चर और लचर सिस्टम द्वारा की गई हत्या है।

जानकारी के मुताबिक, मृतक इंजीनियर अपनी शिफ्ट खत्म कर बाइक से नोएडा सेक्टर स्थित अपने घर की ओर जा रहा था। रास्ते में सड़क पर अनधिकृत रूप से खड़े एक वाहन या सड़क के बीचों-बीच खुले गड्ढे (जैसा कि स्थानीय लोग बता रहे हैं) की वजह से यह भीषण दुर्घटना हुई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि युवक को संभलने का मौका तक नहीं मिला। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने उसे पास के अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
घटना के बाद से मृतक के साथियों और स्थानीय निवासियों में जबरदस्त आक्रोश है। लोगों का कहना है कि नोएडा की कई प्रमुख सड़कों पर स्ट्रीट लाइटें बंद रहती हैं और भारी वाहनों का अवैध रूप से सड़क किनारे खड़ा होना मौत को दावत देता है। 27 साल का वह इंजीनियर, जो अपने परिवार का सहारा था और करियर की बुलंदियों को छूने का सपना देख रहा था, सिस्टम की इन्हीं छोटी लेकिन जानलेवा कमियों की भेंट चढ़ गया।
पुलिस ने इस मामले में अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। हालांकि, सवाल यह उठता है कि क्या केवल एफआईआर दर्ज कर लेने से वह युवा वापस आ जाएगा? नोएडा अथॉरिटी और ट्रैफिक पुलिस के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा आए दिन मासूम नागरिकों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ रहा है।
यह हादसा सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा में है, जहां लोग 'जस्टिस फॉर इंजीनियर' हैशटैग के साथ प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं। युवाओं का कहना है कि रात में काम करने वालों के लिए नोएडा की सड़कें सुरक्षित क्यों नहीं हैं? फिलहाल, इस घटना ने एक बार फिर 'स्मार्ट सिटी' के दावों की पोल खोल दी है और यह साफ कर दिया है कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, सिस्टम ऐसे ही मासूमों को लीलता रहेगा।







