भारत और जर्मनी के बीच प्रगाढ़ होते कूटनीतिक संबंधों की एक खूबसूरत तस्वीर आज अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट पर देखने को मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मनी के नवनियुक्त चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने एक साथ अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव 2026 का उद्घाटन किया और रंग-बिरंगी पतंगें उड़ाईं। दोनों नेताओं ने भगवान हनुमान और तिरंगे वाली पतंगों की डोर थामकर द्विपक्षीय मित्रता का संदेश दिया। इस अवसर पर पीएम मोदी ने कहा कि भारत और जर्मनी करीबी सहयोगी हैं और यह सांस्कृतिक मेलजोल हमारे विश्वास को और गहरा करता है।
राजनयिक मुलाकातों के बीच आर्थिक मोर्चे पर भी भारत-जर्मनी के बीच नई संभावनाओं के द्वार खुले हैं। पीएम मोदी ने रेखांकित किया कि वर्तमान में भारत में 2000 से अधिक जर्मन कंपनियां सक्रिय हैं, जो लाखों लोगों को रोजगार दे रही हैं। चांसलर मर्ज़ के साथ आए एक उच्च स्तरीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ चर्चा के दौरान रक्षा सौदों, ग्रीन हाइड्रोजन और सेमीकंडक्टर तकनीक पर विशेष जोर दिया गया। जर्मनी अब अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारत की ओर देख रहा है और जल्द ही दोनों देशों के बीच 'ग्रीन अमोनिया' की खरीद को लेकर बड़े समझौते होने की उम्मीद है।
यह यात्रा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत और जर्मनी अपने रणनीतिक संबंधों के 25 वर्ष और राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहे हैं। साबरमती आश्रम में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के बाद चांसलर मर्ज़ ने विजिटर्स बुक में भारत की प्रगति और गांधीवादी मूल्यों की सराहना की। इस दौरान पीएम मोदी ने जर्मनी में मौजूद भारतीय बच्ची 'अरिहा शाह' का मुद्दा भी मानवीय आधार पर उठाया। जानकारों का मानना है कि इस यात्रा से न केवल व्यापारिक संबंध मजबूत होंगे, बल्कि डिफेंस प्रोजेक्ट्स में भी जर्मनी भारत का एक प्रमुख साझीदार बनकर उभरेगा।








