मिडल-ईस्ट में युद्ध के बादल गहरा गए हैं। पूर्व सीआईए अधिकारी जॉन किरियाकू ने एक पॉडकास्ट (Julian Dorey Podcast) में दावा किया है कि व्हाइट हाउस के भीतर से मिली जानकारी के अनुसार, अमेरिका ने ईरान पर सैन्य हमला करने का अंतिम फैसला ले लिया है। किरियाकू के मुताबिक, यह हमला सोमवार (23 फरवरी 2026) या मंगलवार (24 फरवरी 2026) को हो सकता है। यह दावा ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रपति ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से ईरान को अपनी शर्तें मानने के लिए 10 दिन का समय दिया था।
किरियाकू ने तर्क दिया है कि ट्रंप प्रशासन अक्सर रणनीतिक रूप से विरोधियों को भ्रमित करने के लिए समय सीमा (Deadline) बदल देता है। उन्होंने कहा कि हालांकि 10 दिन का समय दिया गया है, लेकिन अमेरिका 'ऑफ-बैलेंस' रखने के लिए पहले ही हमला कर सकता है। अमेरिका की मुख्य मांगों में ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम बंद करना, यूरेनियम संवर्धन रोकना और हमास, हिजबुल्लाह व हूतियों जैसे समूहों को समर्थन बंद करना शामिल है। व्हाइट हाउस के भीतर इस मुद्दे पर दो गुट बने हुए हैं, जिसमें एक पक्ष सैन्य कार्रवाई का समर्थन कर रहा है तो दूसरा इसके परिणामों को लेकर चिंतित है।
क्षेत्र में तैनात 30,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा को लेकर भी रक्षा विशेषज्ञ गंभीर चिंता जता रहे हैं। यदि यह हमला होता है, तो यह जून 2025 में हुए 'ऑपरेशन मिडनाइट हैमर' के बाद सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई होगी। वर्तमान में अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत और 'आर्मडा' (बेड़ा) ईरान की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे युद्ध की आशंका और प्रबल हो गई है।








