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इंदौर में घी के नाम पर सेहत से खिलवाड़, जांच में 7 सैंपल फेल, नकली घी बेचने का खुलासा

इंदौर। खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ चल रही कार्रवाई के दौरान इंदौर में घी के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में यह खुलासा हुआ है कि बाजार में शुद्ध घी बताकर बेचे जा रहे कई उत्पाद असल में वनस्पति वसा (Vegetable Fat) से तैयार किए गए थे। जांच के लिए लिए गए 10 सैंपलों में से 7 सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिससे उपभोक्ताओं की सेहत को लेकर गंभीर चिंता खड़ी हो गई है।

कैसे हुआ खुलासा
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने पालदा औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक डेयरी यूनिट से अलग-अलग ब्रांड के घी के सैंपल लिए थे। प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट में सामने आया कि इन सैंपलों में दूध से प्राप्त फैट की जगह हाइड्रोजनीकृत वनस्पति चर्बी का इस्तेमाल किया गया था, जो खाद्य मानकों का सीधा उल्लंघन है।
सेहत के लिए कितना खतरनाक
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की मिलावट से बने घी में ट्रांस फैट की मात्रा अधिक होती है। इसका लंबे समय तक सेवन करने से—
हृदय रोग का खतरा
कोलेस्ट्रॉल बढ़ना
लिवर पर बुरा असर
मोटापा और ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं
हो सकती हैं। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह मिलावटी घी और भी ज्यादा नुकसानदेह बताया जा रहा है।
महंगे दामों पर बिक रहा था नकली घी
हैरानी की बात यह है कि यह मिलावटी घी बाजार में 700 से 800 रुपये प्रति किलो की दर से शुद्ध घी बताकर बेचा जा रहा था। आकर्षक पैकेजिंग और ब्रांड नामों के कारण आम उपभोक्ता आसानी से धोखे का शिकार हो रहे थे।
प्रशासन की कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा विभाग ने संबंधित फर्म को नोटिस जारी कर दिया है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है, जिसमें लाइसेंस रद्द करने और भारी जुर्माने के साथ एफआईआर की भी संभावना है।
उपभोक्ताओं के लिए सलाह
हमेशा विश्वसनीय ब्रांड और दुकानों से ही घी खरीदें
बहुत सस्ता या असामान्य रूप से गाढ़ा घी लेने से बचें
लेबल, लाइसेंस नंबर और निर्माण विवरण जरूर जांचें
निष्कर्ष:
इंदौर में सामने आया यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि मुनाफे के लिए कुछ लोग आम जनता की सेहत से खिलवाड़ करने से भी नहीं चूकते। ऐसे में जरूरी है कि प्रशासन सख्त कार्रवाई करे और उपभोक्ता भी सतर्क रहें।

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