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अरावली संरक्षण और 100 मीटर का विवाद: उत्तर भारत में प्रदर्शनों की वजह...

उत्तर भारत के राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली-NCR में अरावली पर्वतमाला को बचाने के लिए बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इस विवाद की मुख्य जड़ सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वीकार की गई अरावली की नई परिभाषा है। केंद्र सरकार की एक कमेटी की सिफारिश पर कोर्ट ने माना है कि केवल 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाले भूभागों को ही 'अरावली पहाड़ी' की श्रेणी में रखा जाएगा। पर्यावरणविदों और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस नए मापदंड से अरावली का लगभग 90% से 99% हिस्सा संरक्षण के दायरे से बाहर हो जाएगा, जिससे वहां बड़े पैमाने पर अवैध खनन और निर्माण कार्यों का रास्ता साफ हो जाएगा।

प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि अरावली सिर्फ पत्थर की पहाड़ियां नहीं, बल्कि उत्तर भारत का 'सुरक्षा कवच' हैं जो थार रेगिस्तान के विस्तार को रोकती हैं। यदि 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों पर खनन की अनुमति दी गई, तो इससे वन्यजीव गलियारे (Wildlife Corridors) खत्म हो जाएंगे, भूजल स्तर और गिरेगा और दिल्ली-NCR में धूल भरी आंधियों व प्रदूषण का संकट गहरा जाएगा। राजस्थान के उदयपुर से लेकर गुरुग्राम तक लोग सड़कों पर हैं, और सोशल मीडिया पर #SaveAravalli अभियान के जरिए सरकार से इस परिभाषा को वापस लेने की मांग की जा रही है।







