Breaking
- बस्तर के कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में 12 दिन पहले शुरू हुआ सफारी सत्र, पर...
- Dussehra Celebration : बिलाईगढ़ के ऐतिहासिक राजशाही दशहरा उत्सव में शामिल हुए...
- Police Commemoration Day : छत्तीसगढ़ में शांति और सुरक्षा के लिए वीर जवानों क...
- Urban Challenge Fund Conclave: छत्तीसगढ़ के शहरों के सुनियोजित विकास को मिलेग...
- Pradhan Mantri Awas Yojana in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में सामाजिक और आर्थिक प...
- Pradhan Mantri Awas Yojana in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में सामाजिक और आर्थिक प...
- SECL के रिटायर्ड कर्मी का मोबाइल हैक कर 1.39 लाख की ठगी, क्रेडिट कार्ड से फ्ल...
- मायके से नहीं लौटी पत्नी तो फोन पर बोला- 'मैं आत्महत्या करने जा रहा हूं', और ...
- पत्नी से अवैध संबंध के शक में चचेरे भाई पर जानलेवा हमला, आंखों में मिर्च पाउड...
- Crime News: पुनर्वास केंद्र में रह रहे आत्मसमर्पित नक्सली ने लगाई फांसी, पुलि...
असम हिंसा: पश्चिम कार्बी आंगलोंग में तनाव और सीएम सरमा पर उठते सवाल

असम के पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिले में हाल ही में भड़की हिंसा ने पूरे राज्य को दहला दिया है। दिसंबर 2024 के अंत में शुरू हुई इस जातीय हिंसा में अब तक दो लोगों की जान जा चुकी है और 60 से अधिक पुलिसकर्मियों सहित दर्जनों लोग घायल हुए हैं। हिंसा का मुख्य कारण 'ग्राम चराई आरक्षित' (VGR) और 'व्यावसायिक चराई आरक्षित' (PGR) भूमि पर कथित अवैध कब्जे को लेकर स्थानीय आदिवासी समुदाय और हिंदी भाषी बसने वालों के बीच लंबे समय से चल रहा तनाव है।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर विपक्षी दलों और छात्र संगठनों (जैसे AASU) द्वारा सवाल उठाए जा रहे हैं कि सरकार ने 15 दिनों से चल रहे अनशन को गंभीरता से क्यों नहीं लिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन ने उनकी मांगों को अनसुना किया और जब अनशनकारियों की हालत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, तो यह अफवाह फैल गई कि उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। इस गलतफहमी ने आग में घी का काम किया और देखते ही देखते पत्थरबाजी, आगजनी और हिंसक झड़पें शुरू हो गईं। मुख्यमंत्री पर "चयनात्मक बेदखली" (Selective Eviction) का भी आरोप लग रहा है, क्योंकि अन्य क्षेत्रों में सरकार ने बहुत तेज़ी से अतिक्रमण हटाया है, लेकिन यहाँ कानूनी पेच का हवाला दिया जा रहा है।
हिंसा के दौरान भीड़ ने न केवल सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया, बल्कि कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद (KAAC) के मुख्य कार्यकारी सदस्य तुलिराम रोंगहांग के पुश्तैनी घर को भी आग लगा दी। स्थिति पर काबू पाने के लिए प्रशासन को इंटरनेट सेवाएं बंद करनी पड़ीं और सेना को फ्लैग मार्च के लिए बुलाना पड़ा। आलोचकों का कहना है कि अगर मुख्यमंत्री ने समय रहते प्रदर्शनकारियों के साथ संवाद किया होता, तो दो निर्दोष लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
मुख्यमंत्री सरमा ने अपने बचाव में कहा है कि गुवाहाटी हाईकोर्ट ने बेदखली की कार्रवाई पर रोक (Stay Order) लगा रखी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संवैधानिक मर्यादाओं के कारण सरकार बिना अदालती आदेश के किसी को बेदखल नहीं कर सकती। हालांकि, 26 दिसंबर को हुई त्रिपक्षीय बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि सरकार अब खुद हाईकोर्ट में याचिका दायर करेगी ताकि बेदखली पर लगी रोक को हटाया जा सके और विवादित क्षेत्रों में अवैध व्यावसायिक लाइसेंस रद्द किए जा सकें।
वर्तमान में क्षेत्र में भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात हैं और धीरे-धीरे जनजीवन सामान्य हो रहा है। मुख्यमंत्री ने शांति की अपील करते हुए कहा है कि हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं है। सरकार ने मृतक के परिजनों को सरकारी नौकरी और आर्थिक सहायता देने का वादा किया है, लेकिन स्थानीय आदिवासी संगठनों का कहना है कि जब तक उनकी भूमि सुरक्षित नहीं होती, उनका असंतोष बना रहेगा। राज्य सरकार के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती क्षेत्र की जनसांख्यिकीय चिंताओं और अदालती आदेशों के बीच संतुलन बनाना है।







