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इंदौर: भागीरथपुरा में ड्रेनेज लाइन को लेकर विवाद, रहवासी और पार्षद आमने-सामने

इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में ड्रेनेज लाइन बिछाने को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इलाके के रहवासियों का आरोप है कि उन्होंने पहले ही नगर निगम से आग्रह किया था कि ड्रेनेज लाइन उनके घरों के पीछे की गलियों (बैक लेन) से डाली जाए, ताकि मुख्य सड़क और जलापूर्ति लाइन को नुकसान न पहुंचे।

रहवासियों के अनुसार बैक लेन में पर्याप्त जगह उपलब्ध है और इससे भविष्य में पानी की लाइनों में लीकेज या गंदगी मिलने की आशंका भी कम हो सकती थी। लेकिन स्थानीय पार्षद कमल वाघेला ने इस प्रस्ताव का विरोध किया, जिसके बाद मामला तूल पकड़ गया।
काम रोका गया, बढ़ी नाराजगी
पार्षद के विरोध के चलते ड्रेनेज लाइन का काम बीच में ही रोक दिया गया। इससे क्षेत्र में पहले से मौजूद जलभराव और गंदगी की समस्या और गंभीर हो गई। रहवासियों का कहना है कि लंबे समय से वे बदबू, गंदे पानी और संक्रमण के खतरे से जूझ रहे हैं, लेकिन उनकी बातों को नजरअंदाज किया गया।
तकनीकी खामियों पर सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जहां ड्रेनेज लाइन डाली जा रही थी, वहां जलापूर्ति और सीवरेज लाइन के बीच पर्याप्त दूरी नहीं रखी गई, जिससे दूषित पानी मिलने का खतरा बना हुआ है। रहवासियों का कहना है कि यदि समय रहते उनकी मांग मानी जाती, तो यह स्थिति पैदा ही नहीं होती।
निगम से समाधान की मांग
भागीरथपुरा के निवासियों ने नगर निगम से मांग की है कि मामले की तकनीकी जांच कराई जाए और ड्रेनेज लाइन को सुरक्षित स्थान से बिछाया जाए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे सामूहिक आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
यह पूरा मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि जनसमस्याओं पर समय रहते निर्णय क्यों नहीं लिए जाते। ड्रेनेज और साफ पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं में लापरवाही सीधे लोगों की सेहत से जुड़ी होती है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि नगर निगम और जनप्रतिनिधि मिलकर इस विवाद का स्थायी और सुरक्षित समाधान कब तक निकाल पाते हैं।







