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प्रधानमंत्री मोदी ने INS विक्रांत पर नौसैनिकों के साथ मनाई दिवाली, बोले- 'विक्रांत ने पाकिस्तान की नींद उड़ाई'

National RRT News Desk 20 October 2025

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गोवा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को गोवा में देश के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर नौसैनिकों के बीच दिवाली मनाई। एक दिन पहले गोवा पहुंचे पीएम मोदी ने इस दौरान नौसैनिकों से बातचीत की और उन्हें संबोधित किया।

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करीब 40 मिनट के अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने आईएनएस विक्रांत को 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेड इन इंडिया' का एक बड़ा प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, "हमारा विक्रांत आज आत्मनिर्भर भारत और मेड इन इंडिया का बहुत बड़ा प्रतीक है। आईएनएस विक्रांत ने अभी पाकिस्तान की रातों की नींद उड़ा दी थी। जिसका नाम ही दुश्मन का चैन छीन ले, वो आईएनएस विक्रांत है।"

यह 12वीं बार है जब पीएम मोदी दिवाली के मौके पर जवानों के बीच पहुंचे हैं। पिछले साल उन्होंने गुजरात के कच्छ में बीएसएफ, आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के जवानों के साथ दिवाली मनाई थी। बीते 11 सालों में वह सबसे ज्यादा 4 बार जम्मू-कश्मीर के जवानों के बीच पहुंचे हैं।

पीएम मोदी के भाषण की 4 मुख्य बातें:

1. आईएनएस विक्रांत की ताकत: प्रधानमंत्री ने कहा कि महासागर को चीरता हुआ यह स्वदेशी पोत भारत की सैन्य क्षमता का प्रतिबिंब है। उन्होंने दोहराया कि विक्रांत ने पाकिस्तान की नींद उड़ा दी है।

2. ऑपरेशन सिंदूर और सेनाओं का समन्वय: पीएम मोदी ने सेनाओं के शौर्य की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय नौसेना के भय, वायुसेना के अद्भुत कौशल और भारतीय सेना की जाबांजी ने तीनों सेनाओं के जबरदस्त समन्वय के साथ 'ऑपरेशन सिंदूर' में पाकिस्तान को इतनी जल्दी घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।

3. माओवादी आतंक से 100 जिले आज़ाद: प्रधानमंत्री ने देश की आंतरिक सुरक्षा पर भी बात की। उन्होंने बताया कि 2014 से पहले जहां देश के करीब 125 जिले माओवादी हिंसा की चपेट में थे, वहीं पिछले 10 सालों की मेहनत से यह संख्या घटकर मात्र 11 रह गई है। उन्होंने कहा कि 100 से ज्यादा जिले माओवादी आतंक से आज़ाद होकर इस बार खुली हवा में शानदार दिवाली मना रहे हैं।

4. नौसैनिकों के समर्पण को नमन: नौसैनिकों के बीच समय बिताने के अनुभव को साझा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि वह कल से नौसैनिकों के बीच हैं और उन्होंने हर किसी से कुछ न कुछ सीखा है। उन्होंने कहा कि नौसैनिकों की तपस्या, साधना और समर्पण इतनी ऊंचाई पर है कि वह उसे जी नहीं पाए, लेकिन जान जरूर पाए।

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