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1 अप्रैल 2026 से बदल जाएगा आयकर का ढांचा: 'असेसमेंट ईयर' का झंझट खत्म, अब केवल 'टैक्स ईयर' का होगा राज...

National 25 December 2025

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भारतीय कर प्रणाली में दशकों से चली आ रही जटिलता को खत्म करने के लिए सरकार ने आयकर अधिनियम 2025 को मंजूरी दे दी है। यह नया कानून 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा, जो वर्तमान के 1961 के कानून की जगह लेगा। इस बदलाव का सबसे क्रांतिकारी हिस्सा 'असेसमेंट ईयर' (Assessment Year) और 'प्रीवियस ईयर' (Previous Year) की दोहरी अवधारणा को खत्म करना है। अब टैक्सपेयर्स को दो अलग-अलग सालों के भ्रम में नहीं रहना होगा; इसकी जगह एक एकीकृत 'टैक्स ईयर' (Tax Year) चलेगा, जो अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है।

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वर्तमान व्यवस्था में, जिस साल आप पैसा कमाते हैं उसे 'प्रीवियस ईयर' और जिस साल उस पर टैक्स का आकलन होता है उसे 'असेसमेंट ईयर' कहा जाता है। उदाहरण के लिए, वित्त वर्ष 2025-26 की आय का आकलन असेसमेंट ईयर 2026-27 में होता है। नए कानून के तहत अब केवल 'टैक्स ईयर 2026-27' होगा, जो 1 अप्रैल से 31 मार्च तक की अवधि का होगा। इससे करदाताओं के लिए यह समझना आसान हो जाएगा कि वे किस अवधि की आय पर टैक्स दे रहे हैं और रिटर्न दाखिल कर रहे हैं।

नए आयकर कानून का एक मुख्य उद्देश्य सरलीकरण है। पुराने कानून में संशोधनों की वजह से 800 से अधिक धाराएं (Sections) हो गई थीं, जिन्हें नए कानून में घटाकर 536 धाराओं तक सीमित कर दिया गया है। अध्यायों (Chapters) की संख्या भी 47 से घटाकर 23 कर दी गई है। कानून की भाषा को इतना सरल बनाने का प्रयास किया गया है कि एक आम नागरिक भी अपने टैक्स दायित्वों को समझ सके और उसे तकनीकी शब्दों के जाल में न उलझना पड़े।

हालांकि कानून की संरचना बदल रही है, लेकिन करदाताओं के लिए राहत की बात यह है कि टैक्स की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। बजट 2025 में घोषित नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) की दरें ही नए अधिनियम का हिस्सा होंगी। इसमें 12 लाख रुपये तक की आय पर 'जीरो टैक्स' की सुविधा (धारा 87A के तहत रिबेट के साथ) और वेतनभोगियों के लिए 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन शामिल है। सरकार का लक्ष्य मुकदमेबाजी कम करना और स्वैच्छिक कर अनुपालन (Compliance) को बढ़ावा देना है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह सुधार भारत को 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' में और आगे ले जाएगा। 1 अप्रैल 2026 से पहले लंबित सभी पुराने मामलों का निपटारा 1961 के अधिनियम के तहत ही होगा, जबकि नई आय पर नया कानून लागू होगा। डिजिटल प्रक्रियाओं और AI आधारित असेसमेंट को भी नए कानून में वैधानिक मजबूती दी गई है। यह बदलाव न केवल टैक्सपेयर्स बल्कि चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और टैक्स अधिकारियों के लिए भी कामकाज की प्रक्रिया को काफी हद तक सरल बना देगा।

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