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चांदी की कीमतों में बड़ा भूचाल: रिकॉर्ड हाई छूने के बाद 1 घंटे में ₹21,000 टूटी चांदी, जानें अचानक आई इस गिरावट की वजह

नई दिल्ली: भारतीय सर्राफा बाजार में सोमवार (29 दिसंबर 2025) को चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में चांदी ने ₹2,54,174 प्रति किलो का सर्वकालिक उच्चतम स्तर (All-time High) छूकर सबको चौंका दिया था, लेकिन दोपहर होते-होते बाजार में अचानक "क्रैश" जैसी स्थिति बन गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की कीमतें महज एक घंटे के भीतर ₹21,000 प्रति किलो तक गिर गईं, जिससे निवेशकों और आम खरीदारों के बीच हड़कंप मच गया।

चांदी की कीमतों में इस "फ्लैश क्रैश" के पीछे सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक (Geopolitical) बदलावों को माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के बीच युद्ध समाप्त करने को लेकर हुई सकारात्मक बातचीत की खबरों ने निवेशकों को राहत दी है। शांति समझौते की उम्मीदों के कारण सुरक्षित निवेश (Safe-Haven) के रूप में सोने-चांदी की मांग में अचानक कमी आई, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी $80 प्रति औंस से गिरकर $75 के नीचे आ गई।
गिरावट का दूसरा महत्वपूर्ण कारण मुनाफावसूली (Profit Booking) है। साल 2025 में चांदी ने अब तक करीब 180% का जबरदस्त रिटर्न दिया है। रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुँचने के बाद बड़े निवेशकों ने अपना मुनाफा निकालने के लिए भारी बिकवाली (Selling) शुरू कर दी। इसके अतिरिक्त, शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज (CME) द्वारा चांदी के वायदा अनुबंधों पर मार्जिन की दरों में वृद्धि करने के फैसले ने भी सट्टेबाजी पर लगाम लगाई, जिससे बाजार में तेज सुधार (Correction) देखा गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी तेज रैली के बाद ऐसी गिरावट तकनीकी रूप से स्वाभाविक है। वित्तीय फर्म BTIG ने पहले ही चेतावनी दी थी कि कीमती धातुओं की कीमतें "पैराबोलिक" (अत्यंत तीव्र वृद्धि) हो गई हैं, जिसका अंत अक्सर तेज गिरावट के साथ होता है। हालांकि, इंडस्ट्रियल डिमांड और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में चांदी की खपत को देखते हुए लंबी अवधि का रुझान अभी भी सकारात्मक बताया जा रहा है। फिलहाल, बाज़ार में अस्थिरता बनी हुई है और विशेषज्ञों ने छोटे निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।







