छत्तीसगढ़ में खेलों के प्रोत्साहन के लिए आयोजित होने वाले 'सरगुजा ओलंपिक' को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इस आयोजन की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए सरकार से 'गारंटी' मांगी है। वहीं, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पलटवार करते हुए कांग्रेस शासनकाल के भ्रष्टाचार की याद दिलाई है। खेलों के इस मंच पर अब राजनीति की बिसात बिछ चुकी है।
दीपक बैज का हमला: "बस्तर ओलंपिक जैसा घोटाला न हो"
पीसीसी चीफ दीपक बैज ने सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि 'बस्तर ओलंपिक' के नाम पर करोड़ों के घोटाले के आरोप लगे हैं। उन्होंने मांग की है कि सरगुजा ओलंपिक शुरू करने से पहले सरकार यह लिखित गारंटी दे कि इसमें भ्रष्टाचार नहीं होगा। बैज ने आरोप लगाया कि आयोजनों के नाम पर सरकारी खजाने का दुरुपयोग किया जा रहा है और खिलाड़ियों को मिलने वाली सुविधाएं कागजों तक ही सीमित हैं। उन्होंने बस्तर ओलंपिक की जांच की भी मांग दोहराई।
मुख्यमंत्री साय का तीखा पलटवार: "लूटने वाले नसीहत न दें"
कांग्रेस के आरोपों पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जिन्होंने पिछले पांच सालों तक प्रदेश को हर मोर्चे पर लूटा है, वे अब हमें ईमानदारी की नसीहत न दें। सीएम साय ने स्पष्ट किया कि सरगुजा ओलंपिक का उद्देश्य सरगुजा अंचल की खेल प्रतिभाओं को निखारना और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रही है और विकास कार्यों या खेल आयोजनों में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सरगुजा बनाम बस्तर: खेलों के जरिए सियासत साधने की कोशिश?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बस्तर के बाद अब सरगुजा में इस तरह के बड़े आयोजन के पीछे सरकार की मंशा आदिवासी क्षेत्रों में पैठ मजबूत करने की है। वहीं, विपक्ष इन आयोजनों में कमियों को उजागर कर सरकार को घेरने की रणनीति अपना रहा है। सरगुजा ओलंपिक में कबड्डी, तीरंदाजी और अन्य पारंपरिक खेलों का समावेश किया गया है, लेकिन फिलहाल चर्चा खेलों से ज्यादा 'घोटालों और गारंटियों' पर केंद्रित हो गई है।







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