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ट्रंप का 'मिशन ग्रीनलैंड': खनिजों का खजाना या बर्फीला 'बुरा सपना'?

Entertainment RRT News Desk 09 January 2026

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डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड को लेकर अपनी दिलचस्पी दिखाई है, जिसका मुख्य कारण वहां मौजूद अरबों डॉलर के दुर्लभ खनिज (Rare Earth Minerals) हैं। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि ग्रीनलैंड पर नियंत्रण पाकर अमेरिका न केवल अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत कर सकता है, बल्कि चीन पर अपनी निर्भरता भी कम कर सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीनलैंड की बर्फ के नीचे छिपे खजाने को निकालना इतना आसान नहीं है और यह योजना एक 'बुरा सपना' साबित हो सकती है।

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ग्रीनलैंड में खनन के रास्ते में सबसे बड़ी दीवार वहां का बेहद कठोर मौसम है। सर्दियों के महीनों में यहां सूरज नहीं निकलता और तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे चला जाता है। ऐसी स्थिति में 24 घंटे आर्टिफिशियल लाइट में काम करना न केवल खर्चीला है, बल्कि श्रमिकों के लिए जानलेवा भी हो सकता है। भीषण बर्फीले तूफान और जमी हुई जमीन मशीनों के संचालन को लगभग असंभव बना देते हैं, जिससे उत्पादन की गति काफी धीमी हो जाती है।

लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचे का अभाव इस चुनौती को और अधिक जटिल बना देता है। ग्रीनलैंड में खनन क्षेत्रों तक पहुँचने के लिए न तो सड़कें हैं और न ही रेलवे नेटवर्क। सारा सामान और खनिज केवल हेलीकॉप्टर या छोटे जहाजों के जरिए ही लाया जा सकता है। इसके अलावा, समुद्र में बर्फ की वजह से शिपिंग के लिए साल में केवल 2-3 महीने की ही छोटी खिड़की उपलब्ध होती है। अगर इस दौरान कोई बड़ा तूफान आ जाए, तो पूरे साल का रसद और उत्पादन ठप हो सकता है।

एक और महत्वपूर्ण बाधा प्रोसेसिंग यूनिट्स की कमी है। अगर खनिज निकाल भी लिया जाए, तो ग्रीनलैंड में उन्हें शुद्ध करने के लिए कोई स्मेल्टर (गलाने की फैक्ट्री) मौजूद नहीं है। कच्चा माल प्रोसेस करने के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता है, जो ट्रंप के 'आत्मनिर्भर अमेरिका' के उद्देश्य को चोट पहुँचाता है। साथ ही, दुर्लभ खनिजों के साथ अक्सर यूरेनियम जैसे रेडियोधर्मी तत्व भी पाए जाते हैं, जिसके चलते वहां के सख्त पर्यावरण नियमों और स्थानीय समुदायों का भारी विरोध झेलना पड़ सकता है।

अंततः, डेनमार्क और ग्रीनलैंड की स्वायत्त सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि "ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है।" अंतरराष्ट्रीय कानून और स्थानीय लोगों की सहमति के बिना इस द्वीप पर अधिकार करना और वहां से संसाधन निकालना कूटनीतिक रूप से भी विनाशकारी हो सकता है। भारी निवेश के बावजूद, इन बाधाओं के कारण ट्रंप का यह बर्फीला सपना हकीकत बनने के बजाय एक बड़ी आर्थिक और राजनीतिक विफलता में बदल सकता है।

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