राजनांदगांव: छत्तीसगढ़ सरकार की किसान हितैषी नीतियों और समर्थन मूल्य (MSP) पर धान खरीदी की सुदृढ़ व्यवस्था ने प्रदेश के अन्नदाताओं के जीवन में खुशहाली का नया रंग भरा है। राजनांदगांव जिले के प्रगतिशील किसान बलवंत मेश्राम इस बदलाव के सबसे बड़े उदाहरण बनकर उभरे हैं। बलवंत बताते हैं कि पहले खेती केवल गुजर-बसर का साधन थी, लेकिन अब सही मूल्य और समय पर भुगतान मिलने से यह एक लाभप्रद व्यवसाय में तब्दील हो गई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार द्वारा ₹3100 प्रति क्विंटल के मान से धान खरीदी और अंतर की राशि के भुगतान ने उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूती दी है।
बलवंत मेश्राम की सफलता का एक बड़ा राज फसल चक्र परिवर्तन (Crop Diversification) को अपनाना भी है। केवल पारंपरिक धान की खेती पर निर्भर रहने के बजाय, उन्होंने कृषि विभाग की सलाह पर दलहन और तिलहन फसलों को भी आजमाना शुरू किया है। इससे न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ी, बल्कि अलग-अलग फसलों से मिलने वाली आय ने उनके जोखिम को कम कर दिया। बलवंत के अनुसार, सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी और उन्नत बीजों ने उन्हें नई तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया, जिससे उत्पादन लागत में कमी आई और मुनाफा बढ़ा।
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की ऑनलाइन व्यवस्था और 'टोकन तुंहर हाथ' जैसे मोबाइल ऐप ने किसानों की बड़ी चिंता दूर कर दी है। बलवंत मेश्राम कहते हैं कि अब उन्हें मंडियों में बिचौलियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते और न ही अपनी उपज बेचने के लिए लंबी लाइनों में घंटों इंतज़ार करना पड़ता है। पारदर्शी व्यवस्था के कारण उनकी फसल का एक-एक दाना समर्थन मूल्य पर बिक रहा है, जिसका सीधा पैसा सीधे उनके बैंक खाते में पहुंच रहा है। इसी राशि से उन्होंने कृषि यंत्र खरीदे और अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने का सपना पूरा कर रहे हैं।
बलवंत जैसे हजारों किसानों की आय बढ़ने के पीछे राज्य सरकार द्वारा दी जा रही इनपुट सब्सिडी का भी बड़ा हाथ है। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और 'सोलर पंप' की उपलब्धता ने बलवंत के खेतों को बारहमासी हरा-भरा बना दिया है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बलवंत मेश्राम ने जिस तरह से पारंपरिक खेती को आधुनिकता और सरकारी योजनाओं के साथ जोड़ा है, वह अन्य छोटे और सीमांत किसानों के लिए एक मॉडल है। फसल विविधीकरण से होने वाला लाभ अब गांव के अन्य किसानों को भी प्रेरित कर रहा है।
आज बलवंत मेश्राम न केवल अपने परिवार की जरूरतें पूरी कर रहे हैं, बल्कि अपनी मेहनत से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति दे रहे हैं। उनका कहना है कि अगर सरकार का सहयोग और सही मूल्य मिलता रहे, तो खेती वास्तव में 'समृद्धि की राह' बन सकती है। छत्तीसगढ़ की धान खरीदी व्यवस्था ने यह साबित कर दिया है कि जब किसान को उसकी मेहनत का उचित दाम मिलता है, तो पूरा प्रदेश खुशहाली की ओर कदम बढ़ाता है।








