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करोड़ों का बजट और 5 साल में कई बार निर्माण, फिर भी सड़क बनी खंडहर: किसकी लापरवाही ने जनता के पैसों को मिट्टी में मिलाया....

विकास के दावों के बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक महत्वपूर्ण सड़क पिछले 5 वर्षों के भीतर कई बार बनाई गई, लेकिन हर बार कुछ ही महीनों में यह फिर से जर्जर हो गई। करोड़ों रुपये की लागत से बनी यह सड़क आज धूल और गड्ढों में तब्दील हो चुकी है, जिससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर किसकी लापरवाही या 'कमीशनखोरी' ने इस मार्ग को खंडहर बना दिया है। स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों के लिए यह सड़क अब सुविधा के बजाय मुसीबत का सबब बन गई है।

क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण के दौरान घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। ठेकेदार और विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के कारण सड़क की ऊपरी सतह (कोलतार) इतनी कमजोर होती है कि पहली बारिश भी नहीं झेल पाती। आश्चर्य की बात यह है कि पिछले पांच सालों में कागजों पर इस सड़क को कई बार दुरुस्त दिखाया गया और हर बार बजट पास हुआ, लेकिन जमीन पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। गड्ढों के कारण आए दिन यहाँ दुर्घटनाएं हो रही हैं और मरीजों को अस्पताल ले जाना दूभर हो गया है।
इस बदहाली ने सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। जानकारों का कहना है कि जब तक निर्माण की गुणवत्ता की जांच के लिए कोई सख्त 'क्वालिटी कंट्रोल' तंत्र लागू नहीं होगा, तब तक जनता के टैक्स का पैसा इसी तरह बर्बाद होता रहेगा। सड़क के बार-बार टूटने के पीछे ड्रेनेज (निकासी) की कमी और भारी वाहनों के ओवरलोडिंग को भी जिम्मेदार बताया जा रहा है, लेकिन विभाग ने इन समस्याओं के समाधान के बजाय केवल सतही मरम्मत पर ध्यान दिया।
फिलहाल, इस मामले में उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप और निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो रही है। स्थानीय निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गुणवत्तापूर्ण पक्की सड़क नहीं बनाई गई, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे। यह मामला केवल एक सड़क का नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था का है जहाँ विकास के नाम पर करोड़ों रुपये का बंदरबांट हो रहा है और आम आदमी बदहाल रास्तों पर चलने को मजबूर है। अब देखना यह है कि क्या दोषी ठेकेदारों और अधिकारियों पर कोई सख्त कार्रवाई होती है या फाइलें फिर से ठंडे बस्ते में डाल दी जाएंगी।







