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'दूरी' और 'डिजिटल' बाधाएं भारी: छत्तीसगढ़ ग्रामीण शिक्षा की 5 कड़वी चुनौतियां


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रायपुर: भारत की आत्मा गांवों में बसती है, लेकिन जब बात शिक्षा की आती है, तो आज भी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच एक गहरी खाई नजर आती है। छत्तीसगढ़ जैसे वनांचल प्रधान राज्य में ग्रामीण शिक्षा की राह में कई ऐसे रोड़े हैं, जो होनहार बच्चों के भविष्य को सीमित कर रहे हैं।

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1. शिक्षकों की कमी और एकल-शिक्षक स्कूल

आज भी राज्य के कई सुदूर गांवों में स्कूल तो खुल गए हैं, लेकिन वहाँ शिक्षकों की भारी कमी है।

एकल शिक्षक: कई प्राथमिक स्कूल आज भी केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। यदि शिक्षक अवकाश पर हो, तो स्कूल में ताला लटक जाता है।

विषय विशेषज्ञों का अभाव: हाई स्कूल स्तर पर गणित और विज्ञान जैसे विषयों के शिक्षकों की कमी ग्रामीण छात्रों के करियर को प्रभावित कर रही है।

2. बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का अभाव

भले ही सरकार ने 'आत्मानंद स्कूलों' के जरिए सुधार की कोशिश की है, लेकिन सामान्य ग्रामीण स्कूलों की स्थिति अभी भी चिंताजनक है।

जर्जर भवन: बारिश के दिनों में छतों का टपकना और बैठने के लिए पर्याप्त डेस्क-बेंच न होना एक आम समस्या है।

शौचालय और पानी: छात्राओं के लिए अलग शौचालय और स्वच्छ पेयजल की कमी के कारण अक्सर लड़कियां बीच में ही पढ़ाई छोड़ देती हैं (Drop-out)।

3. 'डिजिटल डिवाइड' की मार

डिजिटल इंडिया के दौर में जहां शहरों में 'स्मार्ट क्लास' हैं, वहीं गांवों में स्थिति अलग है।

नेटवर्क और कनेक्टिविटी: ऑनलाइन संसाधनों तक पहुँचने के लिए गांवों में हाई-स्पीड इंटरनेट आज भी एक सपना है।

स्मार्टफोन की कमी: आर्थिक तंगी के कारण हर ग्रामीण छात्र के पास अपनी पढ़ाई के लिए अलग मोबाइल उपलब्ध नहीं है।

4. पलायन और मौसमी बेरोजगारी

ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की एक बड़ी चुनौती 'पारिवारिक पलायन' है।

जब ग्रामीण परिवार काम की तलाश में दूसरे राज्यों में जाते हैं, तो उनके साथ बच्चे भी जाते हैं। इससे उनकी पढ़ाई का क्रम टूट जाता है और वे 'ड्रॉप आउट' की श्रेणी में आ जाते हैं।

5. जागरूकता और सामाजिक रूढ़ियाँ

आज भी कई ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा को 'सरकारी नौकरी' का जरिया मात्र माना जाता है।

लड़कियों की उच्च शिक्षा के प्रति अभी भी पूरी तरह से सोच नहीं बदली है। गांव के पास कॉलेज न होने की स्थिति में परिजनों द्वारा लड़कियों की पढ़ाई रुकवा दी जाती है।

चुनौतियां और समाधान: एक नजर में

चुनौती संभावित समाधान

शिक्षकों की कमी स्थानीय स्तर पर शिक्षकों की नियुक्ति और रोटेशन प्रणाली।

डिजिटल दूरी पंचायतों में फ्री वाई-फाई जोन और सामुदायिक डिजिटल सेंटर।

ड्रॉप आउट स्किल आधारित शिक्षा और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों का समावेश।

निष्कर्ष

ग्रामीण शिक्षा की चुनौतियां केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं हैं, बल्कि यह सामाजिक सुधार का भी विषय है। जब तक गांवों में 'स्कूल की बिल्डिंग' के साथ 'शिक्षा की गुणवत्ता' और 'तकनीक' नहीं पहुँचेगी, तब तक समावेशी विकास का लक्ष्य अधूरा रहेगा।

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